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भिवाड़ी फैक्ट्री हादसा: बिहार के 5 मजदूरों की आग में मौत, केमिकल-पटाखा फैक्ट्री में बड़ी त्रासदी, प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की

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भिवाड़ी (राजस्थान), 16 फरवरी 2026 — राजस्थान के करौली जिले के खुशखेड़ा करौली इंडस्ट्रियल एरिया में सोमवार सुबह एक केमिकल-पटाखा फैक्ट्री में भीषण आग लगने से 8 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 2 अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मृतकों में 5 मजदूर बिहार के मोतिहारी जिले के रहने वाले थे। उनके परिवार भी यहीं किराए के मकानों में उनके साथ रह रहे थे। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद दिल्ली स्थित एम्स रेफर किया गया है।
हादसा सुबह करीब साढ़े नौ बजे तब हुआ जब फैक्ट्री में लगभग 25 मजदूर काम कर रहे थे। अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया, जिससे फैक्ट्री में अफरातफरी मच गई। कई मजदूर समय रहते बाहर निकलने में सफल हुए, लेकिन कुछ अंदर ही फंस गए। आग की चपेट में आने से जो मजदूर अंदर फंसे थे, उनकी पहचान आग पर काबू पाने के बाद मृतकों में हुई।
एडीएम सुमिता मिश्रा ने बताया कि पुलिस को गश्त के दौरान घटना की जानकारी मिली। सूचना मिलते ही प्रशासन और दमकल की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया और अंदर फंसे मजदूरों के शव बाहर निकाले गए। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि फैक्ट्री में केवल केमिकल नहीं बल्कि अवैध रूप से पटाखे भी बनाए जा रहे थे। बताया जा रहा है कि फैक्ट्री के मालिक का नाम राजेंद्र है। प्रशासन ने तुरंत फैक्ट्री को सील कर दिया और मामले की जांच शुरू कर दी।
भिवाड़ी हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा और नियमों के पालन की आवश्यकता को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध फैक्ट्री संचालन और सुरक्षा नियमों की अनदेखी अक्सर ऐसे बड़े हादसों का कारण बनती है। आग फैलने के कारण और सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी पर भी जांच की जा रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदनाएं प्रकट कीं। राज्य सरकार ने मृतक परिवारों को मुआवजा देने और घायलों को हर संभव चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
भिवाड़ी फैक्ट्री हादसा न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है कि उद्योगों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। इसके अलावा, यह घटना बिहार से आए प्रवासी मजदूरों की कठिनाइयों और उनके जीवन की असुरक्षा को भी उजागर करती है। मृतकों में से अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और यह हादसा उनके लिए अपूरणीय क्षति लेकर आया है।
स्थानीय प्रशासन ने मृतक मजदूरों के परिजनों से संपर्क कर उन्हें तत्काल सहायता देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, प्रदेश और केंद्र सरकार ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कमेटी गठित कर दी है। पुलिस और फायर विभाग की टीम लगातार जांच में जुटी हुई है और फैक्ट्री मालिक सहित सभी जिम्मेदारों को कानून के अनुसार सजा दिलाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।
भिवाड़ी हादसे ने औद्योगिक क्षेत्र में सुरक्षा मानकों, श्रमिक अधिकारों और प्रशासनिक सतर्कता की आवश्यकता को एक बार फिर पूरी तरह से उजागर कर दिया है। यह घटना बिहार और राजस्थान दोनों राज्यों के प्रवासी मजदूरों के जीवन की नाजुकता और उनके सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा के मुद्दों पर भी सवाल खड़ा करती है।

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